Thursday, April 08, 2010

बेलारूस से एक कविता






1981 में बेलारूस में जन्मीं वाल्झीना मोल्त की अब तक दो किताबें 'I am as thin as your eyelashes' और 'Factory of Tears' प्रकाशित हो चुकी हैं। फ़िलहाल USA में रहती हैं, University of Baltimore में राईटर-इन-रेजिडेंट हैं। 'भाषासेतु' पर पहली बार।


वाल्झीना मोल्त
अंग्रेजी से अनुवाद : कुणाल सिंह

यह यकीन करना कितना मुश्किल है
यह यकीन करना कितना मुश्किल है
कि आज हम जितने हैं
कभी इससे भी कमसिन हुआ करते थे
कि हमारी खाल इतनी पारदर्शी हुआ करती थी
कि नसों शिराओं की नीली स्याही झांकती थी उससे होकर
जैसे स्कूल कि कॉपिओं के ज़र्द पन्ने पे खिंची हों नीली लाइनें

कि यह दुनिया एक यतीम कुत्ते की मानिंद थी
जो छुट्टी के बाद हमारे साथ खेला करता था
और हम सोचते थे कि एक दिन इसे हम अपने घरों में लिए जाएँगे
हम ले जाते, इससे पेश्तर कोई और बाज़ी मार ले गया
उसे एक नाम दिया
प्रशिक्षित किया कि अजनबियों को देखो तो भौंको
और अब हम भी अजनबियों के घेरे में आते थे

और इसी वजह से देर रात हम जाग पड़ते
और अपनी टीवी सेट की मोमबत्तियों को जला देते
और उनकी गर्म रौशनी की आंच में हमने पहचानना सीखा
चेहरों और शहरों को
और सुबहिया हिम्मत से लैश होकर
फ्राइंग पैन से उतार फेंकना सीखा ओम्लेट को

लेकिन हमारा कुत्ता किसी और के फीते से बंधा बड़ा होता रहा
और हमारी माँओं ने अचानक हमें मर्दों के साथ सोने
और आज की तारीख में देखने से मना कर दिया

किसी बेदाग़ कल्पना में खोने की सोचना कितना आसान होता है।

4 comments:

सागर said...

yeh to rakhne layak kavita hai bhai... bahut achchhe... shukriya

NC said...

ACHI HAI LEKIN THODI TAFF HAI.

रोहित said...

इस कविता में मुझे अच्छा लगा कि जैसे एक यतीम के साथ खेलने की बात करती है वैसे ही कुत्तों में एक ख़ासियत रहती है कि वह अजनबियों पर भौंकते हैं। एक बात और कि इसी वजह से हम देर रात को अचानक जाग जाते हैं। इस कविता से मैं तुम्हें एक बात बताता हूँ। मेरी छोटी बहन जिसका नाम पूजा है,वह भी जब हमारी गली के प्यारे-प्यारे कुत्ते नीमो और नटखट(यह नाम उन्हें पूजा ने ही दिये हैं) भौंकते हैं तो वह कुत्तों को देखने लग जाती है,इसलिए यह कविता मुझे अच्छी लगी।
रोहित, इन्दौर

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

kavita achchhi hai aur tumhe bhi achchhi lagi hogi...lekhika tak mera sadhuvad pahucha do